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ईरान-अमेरिका शांति वार्ता: 14 बिंदुओं वाले समझौते पर विचार; ट्रंप ने दी सख्त चेतावनी तो ईरान ने दिखाए कड़े तेवर

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Posted On:Friday, May 8, 2026

वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आ रही है। बुधवार, 07 मई 2026 को ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि वह अमेरिका द्वारा प्रस्तुत 14 बिंदुओं वाले शांति प्रस्ताव की "गहन समीक्षा" कर रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जॉर्जिया में एक सार्वजनिक सभा के दौरान युद्ध के "जल्द" समाप्त होने का अनुमान जताया है। ट्रंप ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में हुई बातचीत सकारात्मक रही है और एक ऐतिहासिक समझौता अब पहुँच के भीतर है।

प्रस्ताव के मुख्य बिंदु और ट्रंप की शर्तें

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाइट हाउस और तेहरान एक ऐसे 'समझौता ज्ञापन' (MoU) पर काम कर रहे हैं, जो 30 दिनों के भीतर युद्धविराम लागू करने और विवादित परमाणु मुद्दों को सुलझाने का खाका तैयार करेगा।
  • परमाणु प्रतिबंध: राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समझौते के तहत ईरान को अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका भेजना होगा और अपनी भूमिगत परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह बंद करना होगा।
  • आर्थिक प्रभाव: ट्रंप ने स्वीकार किया कि ईरान को रोकने के प्रयासों से ईंधन की कीमतों में अस्थायी वृद्धि हो सकती है, लेकिन उन्होंने इसे दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया।

ईरान का रुख और पाकिस्तान की मध्यस्थता

ईरानी नेतृत्व के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहाँ विदेश मंत्रालय समीक्षा की बात कर रहा है, वहीं ईरानी संसद के कुछ सदस्यों ने इसे "अमेरिका की इच्छाओं की सूची" करार दिया है।
  1. ईरान की चेतावनी: राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने दो-टूक कहा कि अमेरिका बातचीत की मेज पर वह हासिल नहीं कर सकता जो वह युद्ध के मैदान में नहीं जीत पाया।
  2. मध्यस्थ की भूमिका: पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सेतु का काम कर रहा है। इस्लामाबाद ने संभावित शांति संकेतों का स्वागत किया है और अगले दौर की वार्ता की मेजबानी करने की इच्छा जताई है।
इस बीच, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर यह चेतावनी भी दी है कि यदि समझौता विफल होता है, तो सैन्य कार्रवाई पहले से कहीं अधिक तीव्र होगी। इजरायल भी इस पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर बनाए हुए है। दुनिया की नजरें अब अगले 30 दिनों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि यह क्षेत्र स्थायी शांति की ओर बढ़ेगा या विनाशकारी युद्ध की ओर।


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