नए साल 2026 की शुरुआत के साथ ही ताइवान जलडमरूमध्य (Taiwan Strait) में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं। चीन द्वारा ताइवान की 'पूर्ण घेराबंदी' के उद्देश्य से किए गए अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यास ने वैश्विक शक्तियों को आमने-सामने ला खड़ा किया है। ताइवान के चारों ओर मिसाइलों, युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों के इस प्रदर्शन ने न केवल अमेरिका बल्कि यूरोप और एशिया के अन्य देशों को भी चिंता में डाल दिया है।
ताइवान का कड़ा जवाब: F-16 ने चीनी जेट को किया 'लॉक'
इस बार ताइवान ने केवल कूटनीतिक विरोध नहीं किया, बल्कि अपनी सैन्य तत्परता का एक ऐसा फुटेज जारी किया जिसने बीजिंग को चौंका दिया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वीडियो में ताइवानी F-16 विपर फाइटर जेट के स्नाइपर पॉड (Sniper Pod) के जरिए चीनी J-15 लड़ाकू विमान को ट्रैक और 'लॉक' करते हुए दिखाया गया है। सैन्य शब्दावली में इसका मतलब है कि चीनी जेट पूरी तरह ताइवान की मिसाइल की जद में था और एक बटन दबाते ही उसे मार गिराया जा सकता था। यह फुटेज चीन की इस धारणा को चुनौती देने के लिए जारी किया गया है कि वह बिना किसी प्रतिरोध के ताइवान को घेर सकता है।
अमेरिका की चेतावनी और चीन की 'घेराबंदी' रणनीति
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने चीन की इस हरकत को "बिना वजह तनाव बढ़ाने वाला" करार दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि चीन द्वारा ताइवान के मुख्य बंदरगाहों को ब्लॉक करने का अभ्यास अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों के लिए खतरा है।
चीन की हालिया ड्रिल के दो मुख्य उद्देश्य थे:
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द्वीप की घेराबंदी: ताइवान को बाहरी दुनिया से पूरी तरह काटकर उसकी रसद और सैन्य मदद रोकना।
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हमले का पूर्वाभ्यास: कोस्टगार्ड और नौसेना के समन्वय से ताइवान के तटों पर कब्जा करना।
शी जिनपिंग का 'एकीकरण' संकल्प
इस तनाव के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के संबोधन में एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षाओं को दोहराया। उन्होंने कहा कि ताइवान का चीन में विलय "इतिहास की अनिवार्य मांग" है और इसे कोई भी बाहरी ताकत नहीं रोक सकती। जिनपिंग ने 'खून के रिश्तों' का हवाला देते हुए एकीकरण की बात कही, जिसे विशेषज्ञों ने ताइवान के लिए एक सीधी सैन्य धमकी के रूप में देखा है।
चीन का अंतरराष्ट्रीय बिरादरी पर पलटवार
जब जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ (EU) ने चीन के इस आक्रामक व्यवहार की निंदा की, तो बीजिंग ने बेहद तीखा रुख अपनाया। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने इन देशों को 'पाखंडी' करार दिया। चीन का तर्क है कि ये देश ताइवान की आजादी की मांग करने वाली ताकतों को शह दे रहे हैं। बीजिंग ने साफ कहा कि उसकी सैन्य कार्रवाई "संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता" की रक्षा के लिए पूरी तरह जायज है और इसमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष
ताइवान जलडमरूमध्य में वर्तमान स्थिति 'यथास्थिति' (Status Quo) के टूटने की कगार पर है। एक तरफ चीन अपनी सैन्य श्रेष्ठता साबित करने पर तुला है, तो दूसरी तरफ ताइवान और अमेरिका ने दिखा दिया है कि वे किसी भी हमले का जवाब देने के लिए तैयार हैं। 2026 में यह क्षेत्र वैश्विक भू-राजनीति का सबसे खतरनाक फ्लैशप्वाइंट बन गया है।