इस संदर्भ में, वित्त वर्ष 2025 के दौरान वसूले गए 1.3 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड टैक्स कलेक्शन का उदाहरण अक्सर दिया जाता है। हालांकि, एसबीआई रिसर्च का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि उस विशेष वर्ष के आंकड़े को आधार (benchmark) मानना पूरी तरह से गलत होगा। असल में, उस साल शेयर बाजार ने लगभग 30% का बंपर और असाधारण रिटर्न दिया था, जिसके कारण कैपिटल गेन्स टैक्स से होने वाली आय अस्थायी रूप से बहुत अधिक बढ़ गई थी। हर साल शेयर बाजार का प्रदर्शन वैसा ही शानदार नहीं रहता, इसलिए बाजार के एक असाधारण वर्ष को सामान्य मानकर आकलन करना सही नहीं है।
रिपोर्ट में आगे यह भी तर्क दिया गया है कि केवल इस उच्च आंकड़े के आधार पर यह दावा करना पूरी तरह भ्रामक है कि कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म करने से सरकार को सीधे तौर पर 1.3 लाख करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। सामान्य और औसत बाजार स्थितियों के आधार पर यदि गणना की जाए, तो नुकसान की वास्तविक राशि अनुमानित दायरे में ही सिमटी रहेगी।
निष्कर्ष के तौर पर, एसबीआई रिसर्च का यह विश्लेषण नीति निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यह इस बात का संकेत देता है कि यदि सरकार अर्थव्यवस्था और निवेशकों को राहत देने के लिए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाने जैसा कोई बड़ा कदम उठाती है, तो इससे देश के राजकोषीय घाटे और वित्तीय संतुलन पर कोई गंभीर या असहनीय असर नहीं पड़ेगा